FILM REVIEW: मजेदार है कंगना की ‘जजमेंटल है क्या’… बिना दिमाग लगाए देखें

नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और राजकुमार राव की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ आज (26 जुलाई) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. डायरेक्टर प्रकाश कोवेलामुड़ी की यह फिल्म रिलीज से पहले ही चर्चाओं में थी. लोगों को इस फिल्म का इंतजार काफी दिनों से था. फिल्म में कंगना रनौत और राजकुमार के अलावा हुसैन दलाल, सतीश कौशिक, अमायरा दस्तूर, अमृता पुरी और जिमी शेरगिल भी अहम भूमिकाओं में हैं. वैसे इस फिल्म को देखने में आपको बेहद मजा आने वाला है, क्योंकि यह एक मजेदार फिल्म है. बस इसे आप बिना अपना दिमाग लगाए देखें. तारीफ करनी होगी कंगना रनौत और राजकुमार की जोड़ी की, जिन्होंने एक बार फिर अपनी शानदार अभिनय से फिल्म में चार चांद लगाने में कामयाबी हासिल की है.

इस फिल्म की कहानी मानसिक रोग एक्यूट सायकोसिस की शिकार बॉबी की, जिसकी भूमिका निभा रही हैं कंगना रनौत. झगड़े के कारण मां और पिता की मौत के बाद से ही बॉबी बचपन में ही इस बीमारी से जूझ रही है. वैसे बॉबी एक डबिंग ऑर्टिस्ट है, जो साउथ से लेकर हॉरर फिल्मों में अपनी आवाज देती हैं और यही वजह होती कि वह कभी-कभी अपने किरदार को सच में जीने लगती है. इसी वजह से कभी वह पुलिस बन जाती है, तो कभी अपने आप को किसी हॉरर फिल्म की हीरोइन मान बैठती है. वहीं, एक दिन बॉबी अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाती है और उसकी लड़ाई हो जाती है. मारपीत के कारण उसे 3 महीने के लिए मेंटल असाइलम में भी भर्ती किया जाता है और समय पर दवाएं लेने की ताकीद की जाती है.
कहानी में ट्विस्ट
इसी दौरान बॉबी के घर केशव नाम का एक शख्स अपनी पत्नी रीमा के साथ किराए पर रहने आता है और बॉबी केशव की ओर आकर्षित हो जाती है. यहां केशव के किरदार में आपको राजकुमार राव और रीमा के किरदार में अमायरा दस्तूर नजर आने वाले हैं. बॉबी को केशव की हरकतों पर थोड़ा शक होता वह उसकी जासूसी करने लगती है, लेकिन इसी बीच एक मर्डर हो जाता है और फिर शुरू होता फिल्म में ट्विस्ट. फिल्म में पुलिस अफसर का किरदार निभा रहे सतीश कौशिक को बॉबी यह यकीन दिलाने की कोशिश करती है कि कातिल केशव ही है, लेकिन इस मर्डर का इल्जाम केशव बॉबी पर लगाता है. अब आगे क्या होता है, इसके लिए आपको खुद पूरी फिल्म देखनी होगी.

निर्देशक प्रकाश कोवलामुदी ने लेखिका कनिका ढिल्लन की दमदार स्क्रिप्ट के साथ पूरा न्याय किया है. फिल्म का पहला भाग आपको थ्रिलर और सस्पेंस में बांधे रखता है. इस भाग में आपको कुछ डरावने सीन भी देखने को मिलते हैं. निर्देशक ने थ्रिल को बढ़ाने के लिए जिस तरह के कलरफुल इमेजेस वाले सेट्स का इस्तेमाल किया है, वह काफी अलग फील देता है. वहीं जिमी शेरगिल और कंगना के ट्रस्ट वाले दृश्य के जरिए मेंटल इलनेस से पीड़ित रोगियों के प्रति मेसेज देने की कोशिश की गई है. फिल्म में ह्यूमर कहानी को बोझिल नहीं होने देता. इसलिए मेरी राय में यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है.

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