बचपन में कट गए थे दोनों हाथ, संघर्ष के दम पर लिखी सफलता की इबारत

श्रीमाधोपुर। जीवन में अगर कुछ करने का जज्बा हो तो शारीरिक अक्षमताएं भी सफलता की राह नहीं रोक सकती। इसका जीता जागता उदाहरण है श्रीमाधोपुर तहसील के रतनपुरा गांव के ओमप्रकाश सैनी। ओमप्रकाश सैनी दोनों हाथ गंवाने के बाद अपनी लगन और मेहनत के दम पर SBI बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत है।

11 साल की उम्र में कट गए थे दोनों हाथ :

ओमप्रकाश सैनी जब 11 साल के थे, उस समय चारा काटने की मशीन में आने से दोनों हाथ कोहनियों के नीचे से पूरी तरह से कट गए थे। ओमप्रकाश के साथ यह हादसा उस समय हुआ जब वे तीसरी कक्षा में पढ़ते थे। बाद में उन्हें कई दिनों तक परेशानी होती रही। पहले तो उन्हें लिखने में परेशानी हुई, लेकिन निरंतर अभ्यास के बाद लेखन आसान हुआ। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले ओमप्रकाश सात भाइयों में छठे नंबर के हैं।

दसवीं कक्षा में किया स्कूल टॉप :

ओमप्रकाश ने कोहनी और बांह से पैन पकड़ कर लिखना सीख लिया। दसवीं कक्षा में स्कूल भी टॉप किया। कड़ी मेहनत रंग लाई और नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ा। वर्ष 2012 में फस्र्ट ईयर की पढ़ाई के दौरान एसबीबीजे में नौकरी लग गयी। ओमप्रकाश बताते हैं कि ग्रेजुएशन के बाद बैंक में नौकरी तो मिल गई, लेकिन सपना ऊंचे ओहदे पर जाने का था, जिसके लिए अभी भी पढ़ाई जारी है।

खुद चलाते हैं कम्प्यूटर :

ओमप्रकाश कंप्यूटर ऑपरेट करने के लिए कोहनियों तथा बाहों के बीच पैन को फंसाते हैं। फिर पेन से ही की-बोर्ड के बटन दबाते। वे एंड्रॉइड मोबाइल भी आसानी से चला लेते हैं। 31 वर्षीय ओम प्रकाश सैनी लोगों के लिए जज्बा, हौसला तथा जिंदादिली का बड़ा उदाहरण है। फिलहाल ओमप्रकाश एसबीआई बैंक चौमूं में क्लर्क है।

केजरीवाल सरकार का बड़ा ऐलान, 16 दिसंबर से दिल्ली में मिलेगा फ्री वाई-फाई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *