फ्रांस में पहली बार हुआ इंडियन हार्ट वॉल्व का लाइव टेलीकास्ट

जयपुर। चिकित्सा के क्षेत्र में गुलाबी नगरी का नाम विश्व पटल पर चमका है। दुनिया में कृत्रिम हार्ट वॉल्व के अविष्कारक डॉ. एलन क्रिबियर ने फ्रांस (France) में अपने सेंटर पर लाइव ऑपरेशन दिखाने के लिए जयपुर को चुना। गौरव की बात यह रही कि अमेरिका में निर्मित वॉल्व काम में लेने वाले दुनियाभर के कार्डियोलॉजिस्ट ने पहली बार भारत में इजाद किए गए हार्ट वॉल्व का बिना सर्जरी के प्रत्यारोपण का लाइव टेलीकास्ट जयपुर के डॉक्टर के जरिए देखा।

जयपुर के सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. रवींद्र सिंह राव द्वारा पिछले दिनों टावी तकनीक से भारतीय हार्ट वॉल्व के इम्पलांटेशन का केस यहां एक निजी अस्पताल में किया गया जिसका लाइव टेलीकास्ट फ्रांस (France) में हुआ। भारतीय वॉल्व के इम्प्लांटेशन के केस को दूसरे देश में स्टडी के रूप में लिए जाने का यह देश का पहला मामला है।

केस जयपुर में और लाइव दिखाया फ्रांस में :

हाल ही में फ्रांस के रूइन शहर में आयोजित हुई इंटरनेशनल वर्कशॉप में टावी तकनीक समझाने के लिए लाइव केस दिखाने का विशेष सत्र रखा गया था। इसके लिए टावी तकनीक विशेषज्ञ जयपुर के इटरनल हॉस्पिटल के सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. रवींद्र सिंह राव को चुना गया। केस में महाराष्ट्र के एक 72 वर्षीय वृद्ध का हार्ट वॉल्व टावी तकनीक से रिप्लेस किया गया।

क्यों खास है केस :

डॉ. राव ने बताया कि यह केस इसीलिए खास था क्योंकि अभी तक दुनियाभर में यूएसए में बने वॉल्व ही हार्ट पेशेंट को लगाए जाते थे, लेकिन अब इंडियन वॉल्व भी उपयोग में लिए जाने लगे हैं। उन्होंने बताया कि ट्रांसकेथेटर एओर्टिक वॉल्व इंप्लांटेशन (टावी) तकनीक से बिना ओपन हार्ट सर्जरी के वॉल्व रिपलेसमेंट किया जाता है। इसमें पैर की नस के जरिए वॉल्व हार्ट में ले जाया जाकर ठीक किया जाता है।

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