मलेशिया के PM ने नागरिकता कानून पर उठाये सवाल, भारत ने दिया करारा जवाब

नई दिल्ली। देशभर में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने नागरिकता संशोधन क़ानून की ज़रूरत पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘जब भारत में 70 साल से सब लोग साथ रह रह है, तो अब इस नागरिकता क़ानून की क्या जरुरत थी।’

कुआलालंपुर समिट 2019 में दिए गए अपने इस बयान के दौरान महातिर मोहम्मद ने कहा कि ‘मुझे ये देखकर दुख हो रहा है कि जो भारत धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करता है, आज मुसलमानों से उनकी नागरिकता छीन रहा है। लोग इस क़ानून के कारण अपनी जान गँवा रहे है। अगर ये कानून हम अपने यहां लागू करें तो मुझे नहीं पता कि क्या होगा। हर जगह अस्थिरता और अराजकता होगी जिससे सभी को जूझना होगा।’

वहीं मलेशिया के प्रधानमंत्री के इस बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्रालय ने कहा कि ”मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मलेशिया के पीएम ने एक बार फिर भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी की है। नागरिकता संशोधन अधिनियम तीन देशों में सताए जाने वाले अल्पसंख्यकों को फास्ट ट्रैक के आधार पर नागरिकता प्रदान करता है।

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि ‘नागरिकता कानून भारत के किसी भी नागरिक को प्रभावित नहीं करता है और ना ही किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक के खिलाफ है। मलेशिया के प्रधानमंत्री का यह बयान तथ्यहीन है और हम उम्मीद करते हैं कि मलेशिया भविष्य में बिना किसी तथ्य के भारत के किसी भी आतंरिक मामले पर बोलने से बचेगा।’

इस से पहले भी वे कश्मीर से धारा 370 ख़त्म किए जाने पर भी टिप्पणी कर चुके है जिसको लेकर भी लेकर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

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